तेरी हमदर्दी में वो बात है
मेरे दर्द-ए-दिल को आराम है
जो दुनिया ने समझा नहीं
जो किसी ने माना नहीं
वो टुकड़े जो दिखते न थे
पर मेरी रूह में चुभते तो थे
तूने प्यार से सहला कर, मेरे दिल को कुछ बहला कर
उन टुकड़ों को निकाल कर, फिर आग में थोड़ा तपाकर
टूटी शख़्सियत को जोड़ दिया
अहसान कैसा कर दिया
दिल-रूह से है शुक्रिया
मेरे दोस्त, मेरे रहबर
तेरा शुक्रिया, तेरा शुक्रिया
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