तेरी हमदर्दी में वो बात है
मेरे दर्द-ए-दिल को आराम है
जो दुनिया ने समझा नहीं
जो किसी ने माना नहीं
वो टुकड़े जो दिखते न थे
पर मेरी रूह में चुभते तो थे
तूने प्यार से सहला कर, मेरे दिल को कुछ बहला कर
उन टुकड़ों को निकाल कर, फिर आग में थोड़ा तपाकर
टूटी शख़्सियत को जोड़ दिया
अहसान कैसा कर दिया
दिल-रूह से है शुक्रिया
मेरे दोस्त, मेरे रहबर
तेरा शुक्रिया, तेरा शुक्रिया
3 comments:
Beautiful
Dil ki baat 🙃.....
एक कोरे कागज़ में कितनी सिलवटें हैं, कोई बयान नहीं कर सकता। दिल में क्या है, दिल के अंदर क्या है, बाहर क्या है, उसे कोई व्यक्त नहीं कर सकता। यह तो बोलने को बहुत कुछ है, पर अंदर ही अंदर रिसता है, अंदर ही अंदर कसता है, उसे तो बयान भी नहीं कर सकता। कैसे करूँ बयान, एक आँसू जो टपके, बारिश की बूँदों सा लगता है, भारी-सा अंदर दिल अब कहाँ से मिलता है।यह सिलसिला, यह फलफला, यह बहकती हुई बारिशों का दिलदला कब तक चलेगा, कब तक रुकेगा, कुछ कह नहीं सकते। जहाँ पर हम हैं, वहाँ हमेशा रह नहीं सकते। कैसे करूँ बयान अपने दिल की बात किसी से, कोई सुनने को राज़ी, कोई बोलने को राज़ी, सबसे हम कह नहीं सकते।हर एक दिन अब तिल-तिल कर के लगता है, अब कहाँ से दिल, कहाँ संभलता है। बातों से तो बहुत कुछ है बाहर, मगर अंदर यह अंदर सब कुछ छिपता है। कैसे बयान करें, किसको बयान करें, कुछ समझ नहीं आता। अब तो यह दिल ग़म-वक़्त ऐसा है कि मन बहलाने में मन से नहीं संभल पाता।हर एक दिन अब तिल-तिल कर के लगता है, अब कहाँ से दिल, कहाँ संभलता है। बातों से तो बहुत कुछ है बाहर, मगर अंदर यह अंदर सब कुछ छिपता है। कैसे बयान करें, किसको बयान करें, कुछ समझ नहीं आता। अब तो यह दिल ग़म-वक़्त ऐसा है कि मन बहलाने में मन से नहीं संभल पाता।
Written by Geeta negi ✍️......
Ok
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